| ولها |
| هذه الإطلالة الأولى من الطوق الحديديّ |
| لها هذا الغناء |
| ولها الوقت المضاء |
| ولها أن تمرح الآن وأن أسكن برد الصحراء |
| لا أقول الزمن القاسي .. |
| ولا أشكو المجاعات |
| ولكّني أقول النرجس المطعون جاء .. |
| *** |
| فأعدّي لمغنّيك الرماح |
| وأعدّي فرسا بيضاء لا تكبو |
| ووردا للجراح |
| وإذا دقّت على الباب يد .. |
| قولي لها: |
| مرّ هنا الشاعر غنّى ثم راح .. |